रविवार, 31 जुलाई 2011
शनिवार, 23 जुलाई 2011
घूस लेने को क़ानूनी मान्यता
अब ये विचार दिए जा रहे हैं कि घूस लेने को क़ानूनी मान्यता मिले, क्योंकि इससे घूस लेने और देने दोनों की चोरी-छिपे क्रियाकर्म बंद हो जाये यानि जो शर्म बन जाता था वो शान बन जाये . शर्म भी बड़ी अजीब होती है क्योंकि इसे परदे की भी जरूरत होती है पर जब इसे बेपर्दा किया जायेगा तो हो सकता है ये कुछ समय की मांग करे. समय तो लगेगा ही अपने वास्तविक रूप से बाहर निकलने में .
ये विचार दिया जा रहा है की क़ानूनी मान्यता मिलने से लोग घूस लेने की शिकायत पुलिस में बिना किसी डर और भय के करेंगे और तब इस पर अंकुश लगाया जा सकता है पर क्या पता ये कोई नया रूप ले ले . आखिर उपरी कमाई है बंद थोड़े ही होगी.
बचपन में माँ को जब कोई काम कराना होता था तो घूस देती थी वो भी ये कि '' तुझे चौकलेट देंगे '', और चोरी इस बात की थी कि सिर्फ मुझे ही मिलेगा. एक बार चाचा का प्रेमपत्र पहुँचाने पर भी घूस मिला था लेकिन मै भी बार-बार और घूस की मांग करती और नहीं देने पर दादा से शिकायत की धमकी देती .
वाह रे घूस तेरे कितने रूप हैं और जब तुझे मान्यता मिलेगा तो और निखर जाएगी. आगे देखते हैं तू कौन सी करामात करती है.
सोमवार, 18 जुलाई 2011
रविवार, 19 जून 2011
सब कुछ बीत गया, अन्ना हजारे का अनशन फिर बाबा रामदेव का बहुचर्चित अनशन . लाठियां चली , भगदड़ मची, पुलिस की झूठी दलील तो मीडिया की पोल खोलती रिपोर्ट . सरकार की जिद और तानाशाही तथा बिरोधी पार्टी का मुद्दा लपकना . इन सब के बीच भी कुछ हुआ वो था एक संत का बिना किसी तामझाम का अनशन और एक सबसे अच्छी मुहीम के लिए अपनी बलि देना. स्वामी निगमानंद ने अनशन के द्वारा जो अपनी बलि दी , काश हम उसे समझ पाते . एक संत ने वह भागीरथ प्रयास किया जो बिना किसी हो हल्ला का था शायद इसीलिए किसी ने उनकी सुध नहीं ली और जब सुध ली गयी तब तक वे जा चुके थे पर उनका सपना अधुरा रह गया . मै इसमे मीडिया को भी दोष देती हूँ क्योंकि रामदेव और अन्ना के अनशन को तो उसने प्रमुखता से प्रचार किया लेकिन क्या उसे निगमानंद के अनशन को अनदेखा कर देना चाहिए था. लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ क्यों यहाँ पीछे रह गया? क्या उस संत का मौन समर्पण ही इसका कारन था? भगत सिंह की वो बातें याद आती हैं जब उनहोंने कहा था कि बहरों को सुनाने के लिए जोर से आवाज करनी चाहिए . पर इस संत ने चुपचाप ही जनता के सामने गंगा मुक्ति का अभियान रख दिया . नमन है इस संत की.
शनिवार, 11 जून 2011
चुनौती
फिर उम्मीद टूटी
निराशा जाग उठी
अँधेरा बढ़ता गया
दिए की एक लौ ने
चुनौती दी कि आगे बढ़ो
मुकाबला करना होगा
अँधेरे को भागना होगा
तू डर मत
है कठिन पल
अकेले का सफर
कठिन है डगर
फिर भी रख हिम्मत
ऐ निराश मन
चल उठ बढ़
मंजिल अभी दूर है
तो तुझमे भी जुनून है
रख हिम्मत निडर बन
बढ़ा कदम
तू जीत जायेगा
अँधेरा भाग जायेगा
अब मिलेगी रौशनी जो
साथ देगी उम्र भर
जीत जा तू यह चुनौती
यह चुनौती, यह चुनौती .
शुक्रवार, 27 मई 2011
नीचता की हद पार कर गया अमेरिका
यह कोई पहली बार नहीं है कि अमेरिका ने हमें अपमानित किया लेकिन यह मुद्दा मानवाधिकार आयोग के पास जाना चाहिए क्योंकि इसमे एक अठारह साल कि लड़की कृतिका के साथ ऐसी बदसलूकी कि गयी जो मानवता के खिलाफ है . उसे हथकड़ी लगा कर उसके साथियों के सामने जेल ले जाया गया और उसके घर वालों को भी खबर नहीं दी गयी. वह कोई साधारण लड़की नहीं थी फिर भी भारतीय दूतावास में स्थित उसके पिता सूचना नहीं दी गयी, क्यों ? उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और बाथरूम तक नहीं जाने दिया गया. अंत में वह सबके सामने ही वह काम की जो इतनी बड़ी लड़की के लिए कितनी शर्मनाक हुई होगी. क्या यह मानवाधिकार का उलंघन नहीं है?
हम सभी भारतीयों को इसका हर माध्यम से विरोध करना चाहिए और अमेरिका को धिक्कारना चाहिए. जिस मानसिक दौर से कृतिका गुजारी होगी वह कितना भयावह होगा. उसे इंसाफ कैसे मिलेगा?
रविवार, 15 मई 2011
बाईस लाख में दूल्हा बिका और दुल्हन----------
वाह रे समाज और यहाँ बसे लोभ , हम तरक्की कर मंगल पर निवास करने की सोंच रहे है पर क्या वहां भी दहेज़ के लिए हम मुंह बाए खड़े रहेंगे? काफी व्यथित कर गया मुझे यह समाचार जो मेरे पड़ोस का ही है. बेचारा दूल्हा बलि का बकरा बन गया.
हुआ ये की लड़का बैंक में पीओं है और उसके लिए रिश्ते भी अनेक आये. पता नहीं उसकी किस्मत में क्या लिखा था कि घरवालों कि लालची नियत ने उसे दहेज़ कि मंदी में बेंच दिया, कीमत लगी बाईस लाख और बेचारा हलाल हो गया .
बात येही तक नहीं रही , बारात शान से निकली तथा दुल्हन अगले दिन ससुराल आई, पर हाय रे किस्मत लड़के की भी नीलम हो गयी. ससुराल में आकर वो छत से कूदने लगी, बाल नोचने लगी और जो कोई उसके पास आता उसे काटने लगती. इधर रिसेप्सन की तैआरी और उधर दुल्हन की बीमारी यानि पागल लड़की से पैसे का लालच देकर शादी कर दी गयी और धन के लोभ में लड़का पछ यह भी नहीं जान पाया की लड़की पागल है, तो अब यह दोष किसका है और लड़का बेचारा क्या करे?
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