हिंदी हमारे देश की बिंदी और क्षेत्रीय भाषाएँ उसकी सजावट
निज भाषा उन्नति अहै , सब उन्नति को मूल ।
बिन निज भाषा ज्ञान के , मिटत न हिय को सूल ।।
अंग्रेजी पढिके जदपि , सब गुण होत प्रवीन ।
पै निज भाषा ज्ञान बिन , रहत हीन के हीन ।।
भारतेंदु हरिश्चंद के ये पंक्तियाँ मुझे हिंदी दिवस के दिन याद आ जाती है । आज भी हमें ढोल पीटकर यानि आयोजनों के द्वारा हिंदी को याद करना पड़ता है , ये है हमारी ओर से हिंदी का सम्मान, वो भी सिर्फ एक दिन का । अगले दिन फिर हमारी सुबह गुड मॉर्निग से शुरू होती है और गुड नाईट पर ख़त्म होती है । हम आयोजनों में रूचि रखते हैं लेकिन ये कभी नहीं करते कि घर के बच्चों को अपनी मातृभाषा में बात करना सिखाएं । बचपन से ही यदि बच्चों को हिंदी का शुद्ध उच्चारण सिखाया जाय तो हमारे देश में हिंदी दिन पर दिन परायी नहीं होती जाएगी । अंग्रेजी के निचे दबी हमारी हिंदी अब छटपटा रही है आजाद होने के लिए और हम ख़ामोशी से उसे बेबस होते देख रहे है ।
मुझे ख़ुशी होती है जब हम ब्लॉग लिखने वाले सभी साथी एक- दूसरे का प्रोत्साहन करते है और हमारा भी प्रयास हिंदी की महत्ता को बढ़ने में योगदान देता है । हिंदी हमारे देश की बिंदी है और क्षेत्रीय भाषाएँ उसकी सजावट , तभी तो हमारा देश रंग-रंगीला है ।