प्रेम का अहसास
जो सुरूर छाया हमपे
मदहोश हो गए हम
ख़ामोशी उनकी समझी
कि उनके हो गए हम ...........
जो बादलों से पूछी
क्यों मस्त चल रहे वो
तो मस्तियों से समझी
धरती से मिल चुके वो ...........
जो गुनगुनाता भौरा
खामोश हो गया तो
फिर चमन ने समझा
मदहोश हो गया वो ...............
जो ऋतु वसंत आया
कोयल ने तान छेड़ी
अमराइयों ने समझा
कि प्रेम में वो डूबी .....................