सड़क पर तड़पती एक जिंदगी
मर गई मानवीयता
मुँह फेर लेती इंसानियत
तड़पती, विलखती जिंदगी
दूर खड़ी तमाशबीन संवेदना
सिमट कर रह गयी भावना।
बना लिया है हमने
एक निश्चित दायरा
स्वयं से निकलकर
स्वयं में ही मिलती
हमारी जिंदगी।
एक पल के लिये ठहरी
पुनः गंतव्य की ओर
देख भर लिये हमने
सड़क पर तड़पती
एक जिंदगी …………
सड़क दुर्घटना पर लोगों की सुप्त मानवता से आहत मेरी ये रचना ………
मर गई मानवीयता
मुँह फेर लेती इंसानियत
तड़पती, विलखती जिंदगी
दूर खड़ी तमाशबीन संवेदना
सिमट कर रह गयी भावना।
बना लिया है हमने
एक निश्चित दायरा
स्वयं से निकलकर
स्वयं में ही मिलती
हमारी जिंदगी।
एक पल के लिये ठहरी
पुनः गंतव्य की ओर
देख भर लिये हमने
सड़क पर तड़पती
एक जिंदगी …………
सड़क दुर्घटना पर लोगों की सुप्त मानवता से आहत मेरी ये रचना ………