शनिवार, 9 जून 2012

आओ पेंड लगायें हम

 आओ पेंड लगायें हम

आओ पेंड लगायें हम 
 धरती को  हरा  बनायें हम 
तपती धरती को मिलकर  फिर से 
 शीतल स्वर्ग बनायें हम 
 आओ पेंड लगायें हम 

इक छोटी बगिया हो अपनी 
जिसमे फूल लगायें हम 
फिर रंग - बिरंगी तितलियों के 
पीछे दौड़ लगायें हम 
आओ हरियाली लायें हम 
इक सुन्दर जहाँ बसायें  हम 

जहाँ कल - कल करती नदियाँ हों 
छोटी - छोटी सी तलैया हो 
फिर कागज की कश्ती को ले 
बारिश में तेज बहायें हम 
आओ पेड़ लगायें हम 
धरती को हरा बनायें हम

17 टिप्‍पणियां:

  1. एक एक सार्थक प्रयास खुद से आरम्भ करें हम .... खोया स्वर्ग खुद ही लाना होगा

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    1. जिस तरह से गर्मी बढ़ रही है उसके समाधान के लिए हमें पेंड लगाने ही होंगे

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  2. बहुत ही सुन्दर..सिख देती रचना..
    आओ पेंड लगायें हम
    धरती को हरा बनायें हम
    तपती धरती को मिलकर फिर से
    शीतल स्वर्ग बनायें हम
    आओ पेंड लगायें हम
    अति सुन्दर...

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  3. साएर्थक सन्देश देती रचना ... आज की जरूरत है पेड़ लगाना ...

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  4. बहुत ही अच्छा संदेश।


    सादर
    ----
    ‘जो मेरा मन कहे’ पर आपका स्वागत है

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  5. बिल्कुल
    समाज का सही राह दिखाती कविता

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  6. सार्थक आह्वान ...
    इस मुहिम मे मैं आपके साथ हूँ ...!!

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  7. व्रक्ष हमारे प्राण रक्षक इससे सदा तुम प्यार करो
    पाप हारिणी पवित्र नदियां इसको तुम गरल करो

    आओ पेड़ लगायें हम धरती को हरा बनायें हम
    सुंदर रचना,,,,, ,

    MY RECENT POST,,,,काव्यान्जलि ...: ब्याह रचाने के लिये,,,,,

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  8. अब भी न चेते तो न जाने संभलने का मौक़ा मिले भी या नहीं!

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  9. सार्थक सीख देती सुन्दर रचना..

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  10. सन्देश देती रचना इस उत्कृष्ट रचना के लिए ... बधाई स्वीकारें....!!!

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  11. बहुत सुन्दर.......
    अब न जागे तो फिर कब????

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  12. आओ पेड़ लगायें हम
    धरती को हरा बनायें हम.....sarthak rachna.

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  13. सुन्दर सी मनमोहक प्रस्तुति.
    पेड़ लगाने की प्रेरणा देती हुई.

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