शुक्रवार, 15 जून 2012


छुट्टियाँ क्या हुई बच्चों की दुनिया में एक नया जोश आया और  शैतानियों की  भरपूर लिस्ट तैयार थी . कोई  किसी से कम  नहीं था , एक से एक नए कारनामे होने लगे , अब इस बेचारी बिल्ली की शामत  आई थी  जो बच्चों के सामने आ गयी .......................................ये  तो होना ही था .
 
 दोस्ती बड़ी प्यारी होती है . आओ दोस्त साथ थोडा घूम ले .







छोटे नबाब को  फूल बड़े प्यारे लगते है .




 मै तो बड़ी अच्छी बिटिया हूँ ................................................
एक  छोटी सी गुडिया हूँ ................................


 मम्मी ये  मेरा खिलौना ले लिया ....................................................ऊँ ......ऊँ ..............
गले मिलकर सारे गिले - शिकवे दूर हो गए ........................अरे ...........ये तो जादू की झप्पी है ..................


6 टिप्‍पणियां:

  1. सब ठीक था,बस रोते बच्चे की तस्वीर से मूड ऑफ हो गया। बच्चे हंसते ही अच्छे लगते हैं क्योंकि केवल उनकी हंसी सहज है।

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  2. अब छुट्टियां खत्म हो गयी, बच्चे धमाचौकड़ी भूल कर किताबों के बोझ से उबरने की जुगत में लग जाएगें।


    मिलिए सुतनुका देवदासी और देवदीन रुपदक्ष से रामगढ में

    जहाँ रचा गया महाकाव्य मेघदूत।

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  3. बच्चों की धमाचौकड़िया बहुत नटखट होती है..प्यारी-प्यारी सी..

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  4. बच्चों के सुंदर चित्र ,,,,,अच्छे लगे,,,,

    RECENT POST पर याद छोड़ जायेगें

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    बेहतरीन रचना


    दंतैल हाथी से मुड़भेड़
    सरगुजा के वनों की रोमांचक कथा



    ♥ आपके ब्लॉग़ की चर्चा ब्लॉग4वार्ता पर ! ♥

    ♥ पढिए पेसल फ़ुरसती वार्ता,"ये तो बड़ा टोईंग है !!" ♥


    ♥सप्ताहांत की शुभकामनाएं♥

    ब्लॉ.ललित शर्मा
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