शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

   जीवन  सफर




थाम कर  हाथ  जो उनका
वक्त के साथ बढ़ाये कदम
अभी तो चलना बहुत दूर है
यही तो है जीवन सफर

 



मंजिलें राह भी दिखाती रहती
  हौसले अब भी बुलंद हैं
  कदम बढ़ तो  रहे   हैं
पर बाधाएँ कुटिलता दिखाती रहती



 

 खामोशियाँ हैं  फिर भी
राज अन्दर कैद है
 दिल के दरवाजे बंद हैं
पर दस्तक होती अभी भी




अफसाने  और भी हैं जिंदगी के 
संभाले उनको रखा है
करीब दिल के छुपा है
प्यार मीत मेरे मन के । 


22 टिप्‍पणियां:

  1. अफसाने और भी हैं जिंदगी के
    संभाले उनको रखा है
    करीब दिल के छुपा है
    प्यार मीत मेरे मन के ।

    सुन्दर भाव.

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  2. बहुत खूब उम्दा प्रस्तुति
    अरुन शर्मा
    www.arunsblog.in

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  3. अनुपम भाव संयोजित किये हैं आपने इस अभिव्‍यक्ति में ..

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  4. थाम कर हाथ जो उनका
    वक्त के साथ बढ़ाये कदम
    अभी तो चलना बहुत दूर है
    यही तो है जीवन सफर
    सुंदर रचना ....
    शुभकामनायें ...

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  5. शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन.
    बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी.बेह्तरीन अभिव्यक्ति!शुभकामनायें.
    आपका ब्लॉग देखा मैने और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

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  6. मंजिलें राह भी दिखाती रहती
    हौसले अब भी बुलंद हैं
    कदम बढ़ तो रहे हैं
    पर बाधाएँ कुटिलता दिखाती रहती ...

    ये तो होना ही है ... पर होंसला है तो फिर क्या डर ... बहुत खूब लिखा है ...

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  7. उत्तर
    1. आप सभी का धन्यवाद , प्रोत्साहन आप सभी से मिलता है

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  8. मनोहर भाव अभिव्यक्ति .रहतीं लिखें रहती के स्थान पर बहुवचन के साथ आ रहा है .

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  9. डॉक्टर साहिबा संध्या जी

    अच्छा काव्यप्रयास है …
    सुंदर भाव ! सुंदर शब्द !
    खूबसूरत रचना !

    …आपकी लेखनी से और भी सुंदर सार्थक रचनाओं का सृजन हो , यही कामना है …
    शुभकामनाओं सहित…

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  10. अफसाने और भी हैं जिंदगी के
    संभाले उनको रखा है

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  11. कोमल भावों से सजी सुंदर कृति..

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  12. अति सुन्दर अभिव्यक्ति....
    बहुत बढ़ियाँ....
    :-)

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  13. अफसाने और भी हैं जिंदगी के
    संभाले उनको रखा है
    करीब दिल के छुपा है
    प्यार मीत मेरे मन के ।

    खूबसूरत अफसाना. कोमल अहसास. सुंदर चित्रमयी प्रस्तुति.

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  14. अफसाने और भी हैं जिंदगी के
    संभाले उनको रखा है
    करीब दिल के छुपा है
    प्यार मीत मेरे मन के ।

    बहुत सुंदर ......शुभकामनायें .....

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  15. आपकी यह प्रस्तुति अच्छी लगी। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

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  16. खामोशियाँ हैं फिर भी
    राज अन्दर कैद है
    दिल के दरवाजे बंद हैं
    पर दस्तक होती अभी भी......संध्या जी ..बहुत ही सुन्दर भाव ...सकारात्मकता लिए ...ख़ामोशी में भी सदा होती है ,मगर ये सदा बहुत ही कम लोगो को सुनाई पड़ती है ..क्यूंकि खामोशियों को सुनने के लिए पहले खुद का मंथन करना पड़ता है ...

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