बुधवार, 14 नवंबर 2012

मन से मन की बात 
 http://www.pictures13.com/wp-content/uploads/2011/05/Nature-pictures-1.jpg

मन से पूछता है मन, उड़ान अब कितनी 
हँस के बोलता है मन, जिन्दगी जितनी ।

सुनहरे पंख लगे हैं , उड़ान भरने दो 
जो ख्वाब देखे हैं , पूरी करने दो ।

बदल नहीं सके जो ख्वाब, हकीकत जैसी 
मन ही में ख्वाब को, हकीकत बनने  दो ।

ख्वाब तुमसे ही तो बनते हैं, ऐ मेरे मन 
उड़ान भरने दो मन को, मन हो जितनी । 

33 टिप्‍पणियां:

  1. bahut sundar prastuti, ख्वाब तुमसे ही तो बनते हैं, ऐ मेरे मन
    उड़ान भरने दो मन को, मन हो जितनी ।

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  2. उत्तर
    1. धन्यवाद आपका प्रोत्साहन मिलता रहे .....

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  3. बदल नहीं सके जो ख्वाब, हकीकत जैसी
    मन ही में ख्वाब को, हकीकत बनने दो,,,,सुंदर पक्तियाँ,,,,

    RECENT POST: दीपों का यह पर्व,,,

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  4. मन से पूछता है मन, उड़ान अब कितनी
    हंस के बोलता है मन, ज़िंदगी जितनी

    उम्र की घाटियों से गुज़रते हुए
    ऐसे सवालात लगातार हमारे रू-ब-रू आ खड़े होते हैं
    और जवाब भी…

    बहुत सुंदर डॉ. संध्या तिवारी जी !
    अच्छी रचना है …

    शुभकामनाओं सहित…
    राजेन्द्र स्वर्णकार

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  5. बनी रहे त्यौंहारों की ख़ुशियों हमेशा…
    ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
    ♥~*~दीपावली की मंगलकामनाएं !~*~♥
    ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
    सरस्वती आशीष दें , गणपति दें वरदान
    लक्ष्मी बरसाएं कृपा, मिले स्नेह सम्मान

    **♥**♥**♥**●राजेन्द्र स्वर्णकार●**♥**♥**♥**
    ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ

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  6. मन से पूछता है मन, उड़ान अब कितनी
    हँस के बोलता है मन, जिन्दगी जितनी ।
    वाह ... बहुत खूब।

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  7. आकांक्षा सपने सकल, भर लें सफल उड़ान |
    मंजिल पर पहुंचे सही, काट सभी व्यवधान ||

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  8. मन को उनकी उड़ान भरने दो..
    सपने देखने दो..क्या पता सपने सच भी हो जाये...
    सुन्दर भाव लिए रचना...
    :-)

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  9. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  10. ख्वाब तुमसे ही तो बनते हैं, ऐ मेरे मन
    उड़ान भरने दो मन को, मन हो जितनी ।
    प्रस्तुतकर्ता Dr. sandhya tiwari पर 7:42 am कोई

    करामाती इस्तेमाल किया है मन शब्द का ,बधाई

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  11. बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!
    शुभकामनायें.

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  12. उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

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  13. मन पंछी उन्मुक्त है, मन की बात न मान।
    जीवन एक यथार्थ है, इसको ले तू जान।।

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  14. मन से पूछता है मन, उड़ान अब कितनी
    हँस के बोलता है मन, जिन्दगी जितनी । ... सोचती हूँ,ज़िन्दगी कितनी - कहता है मन ...जितनी उड़ान भर लो उतनी

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  15. उडान --जिंदगी जितनी ...बहुत सुन्दर
    पधारे ;http://kpk-vichar.blogspot.in

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  16. बहुत ही सुन्दर रचना...
    अति सुन्दर...
    :-)

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  17. बदल नहीं सके जो ख्वाब, हकीकत जैसी
    मन ही में ख्वाब को, हकीकत बनने दो ।

    bahut prabhavshali bhav ke sath sundar rachana

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  18. मन से पूछता है मन, उड़ान अब कितनी
    हँस के बोलता है मन, जिन्दगी जितनी ।
    सुंदर मन की सुंदर बात ......
    सकारात्मक सोच ....सुंदर रचना ...

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  19. ख्बाब का हकीकत बनना अच्छा लगता हैं.......

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  20. मन से पूछता है मन, उड़ान अब कितनी
    हँस के बोलता है मन, जिन्दगी जितनी ।SUNDAR..

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  21. ख्वाब तुमसे ही तो बनते हैं, ऐ मेरे मन
    उड़ान भरने दो मन को, मन हो जितनी ।
    आदरणीया डॉ संध्या जी बहुत सुन्दर प्रेरक सन्देश काश ऐसा ही हो जाए समाज बन जाए ...आइये सदा धनात्मक रुख रखे चलें ...बधाई
    भ्रमर 5

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  22. ख्वाब तुमसे ही तो बनते हैं, ऐ मेरे मन
    उड़ान भरने दो मन को, मन हो जितनी ।

    सुंदर मन की उड़ान ...!!
    सुंदर रचना ...!!
    शुभकामनायें।

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  23. उड़ान ओर पंख ... दोनों ही जरूरी हैं समग्रता बनाए रखने के लिए ...

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  24. ख्वाब तुमसे ही तो बनते हैं, ऐ मेरे मन
    उड़ान भरने दो मन को, मन हो जितनी ।

    खूबसूरत अभिव्यक्ति .......

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