शनिवार, 23 फ़रवरी 2013



 

जिंदगी के सपने  

 चंदा से पूछकर
चांदनी चुरा लायी हूँ
घरौंदे में सजाकर
रौशनी फैलाई  हूँ। 

बादलों को रोककर
अभी अभी तो आयी  हूँ
जो आये वो तो
बरसने को बोल आयी  हूँ। 

चमन की हर कली  से पूछकर
अनेकों रंग लायी हूँ
भरके जिंदगी में उनको
वसंत - बहार लायी हूँ .

समय से पूछकर 
कुछ पल चुराके लायी हूँ
जो जी लूँ इसमें तो
अनमोल सुख मैं पायी हूँ। 

हया से पूछकर
लाली प्रेम की लायी हूँ
अधरों पे सजा के
प्रेमगीत गायी  हूँ .

पिया के प्रेम में रमकर
जोगन बन आयी  हूँ
डूबके गहराईयों में
प्रेमरस पायी हूँ। 


सपने मैं सजाकर  
जिंदगी की आयी  हूँ 
खुशियाँ हो बसंती 
ख्वाहिशें सजायी  हूँ। 












  

26 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर.....
    मनभावन रचना....
    वासंती बयार सी...

    अनु

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  2. बहुत प्यारे एहसासों को पिरोया है ... सुंदर प्रस्तुति

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    1. धन्यवाद........आशीष की कामना है ...........

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  3. चंदा से पूछकर
    चांदनी चुरा लायी हूँ
    घरौंदे में सजाकर
    रौशनी फैलाई हूँ।

    बहुत ही सुन्दर अल्फाज.

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  4. समय से पूछकर
    कुछ पल चुराके लायी हूँ
    जो जी लूँ इसमें तो
    अनमोल सुख मैं पायी हूँ।-----behad bhaw purn sunder rachna ki badhai

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  5. वाह संध्या जी , ये पूछकर की गयी चोरी बड़ी प्यारी है..

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  6. बहुत अच्छी रचना आन्नद मय करती रचना

    मेरी नई रचना

    ये कैसी मोहब्बत है

    खुशबू

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  7. उत्सव और उल्लाह के रंग लिए वासंतिक भाव.....

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  8. सपने मैं सजाकर
    जिंदगी की आयी हूँ
    खुशियाँ हो बसंती
    ख्वाहिशें सजायी हूँ।

    सपनों और ख्वाहिशों की महफिल सजाकर जो बासंती बयार बहुत सुंदर लगी संध्या जी.

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  9. यही प्रेम और विश्वास बना रहे..बहुत सुंदर कविता..

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  10. बड़ी भावनात्मक पंक्तियाँ हैं.

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  11. सपने मैं सजाकर
    जिंदगी की आयी हूँ
    खुशियाँ हो बसंती
    ख्वाहिशें सजायी हूँ। ati sundar...

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  12. पिया के प्रेम में रमकर
    जोगन बन आयी हूँ
    डूबके गहराईयों में
    प्रेमरस पायी हूँ। ...
    पिया के प्रेम में डूबे हो तो कुछ लाने की नहीं ... सब कुछ अपने आप ही आ जाता है ...
    सुन्दर भावमय रचना ...

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  13. पिया के प्रेम में रमकर
    जोगन बन आयी हूँ
    डूबके गहराईयों में
    प्रेमरस पायी हूँ।


    सपने मैं सजाकर
    जिंदगी की आयी हूँ
    खुशियाँ हो बसंती
    ख्वाहिशें सजायी हूँ।
    वाह . बहुत सुन्दर प्रस्तुति .

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  14. जिन्दगी के सपने ऐसे ही हो सदा वासंती ....
    बहुत खूब !

    Recent Post :आखिर कब ?

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  15. वाह... उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

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  16. सपने मैं सजाकर
    जिंदगी की आयी हूँ
    खुशियाँ हो बसंती
    ख्वाहिशें सजायी हूँ।

    ...वाह! गहन अहसासों की बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति...

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