सोमवार, 27 सितंबर 2010

शिव जब दुष्टो का दमन तथा सृष्टी का प्रलय करते है तो रूद्र रूप धारण कर लेते हैं और जब वही देवता सृष्टी का पालन और धारण करते है तो "शिव" या "शंकर" कहलाते है। ऋग्वेद के एक मन्त्र में प्रार्थना की गयी है-
"हे रूद्र ! क्रोध वश आप हमारे बच्चों, वंशजो , पशुओं और अश्वो का विनाश न करो। हम हविशों के साथ तुम्हारा आवाहन करते है ।

8 टिप्‍पणियां:

  1. Sandhya ji,
    hiindi blog jagat men apka svagat karte huye khushee ho rahee hai.
    meree hardik shubhkamnayen apke sath hain.
    Poonam

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  2. आपकी सोच सकारात्मक है, ऐसे ही लिखते रहें और और हिंदी ब्लोगिंग को सींचें, शुभकामनाएं !

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  3. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
    ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
    हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    मालीगांव
    साया
    लक्ष्य

    हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
    अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
    अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

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  4. आप कि सोच अच्छी है| धन्यवाद|

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  5. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  6. इस सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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