रविवार, 19 सितंबर 2010

सूरज की तपती गर्मी से
सूखी धरती सारी
फिर बारिश की बूंदों से
चहुँ ओर हुई हरियाली
हरी हरी बगिया में फिर से
उड़ती तितली रानी
और किसानो ने फिर से
खेतो में बीज बिछाई
काले काले मेघो से
बच्चो ने आस लगायी
और लिए कागज की कश्ती
फिर से दौड़ लगायी

2 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है बहुत खूब....बहुत तराशी हुई रचना है,
    बहुत ही सुन्‍दरता से व्‍यक्‍त बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।
    ......आनंद आगया.

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